का हैरो है जी? राम राम
हाल इ मोकू पतो चलो कि इ दुनिया जाल पै कछु लोगन्ने राजस्थानी मे चिठ्ठो लिखबो शुरु कियो हत्ते ( न्यां पै देख लीजो )। तो बात ऐसी हत्ते कि मैने ऊ सोची, मैऊ कछु करूं। भैया अपन तो राजस्थान के करौली जिले में हिण्डौन-सूरौठ के रेवे वारे ठेरे, तो फ़िर मेने मगज पै जोर डाल कैनी सोची, क्यों नई ब्रिज भाषा मे ई कछु लिखबे लगूं।
गल्लैन दिन हैगे या भाषा में बोले। बैसे तो मैं कोसिस करूं कि कोइ अपन की तरफ़ कै मिल जाय तो बासे अपनी बोली में ही बोलूं।
रेवे कू तो मैं गल्लैन दूर अमरीका मैं रऊ, पर अपनी जमीन ते जुडे रेवे की पूरी पूरी कोसिस करूं। करौली के कछु छोरा-छोरीन्ने मिल्कैनी एक सन्गठन भी बना रक्खौए जाकौ ना "क्यारी" हत्ते, इतौ देख लिजो ।
"क्यारी" कौ उद्देश्य ई हतौ कि बे लोग जो करौली जिले मे कहींऊ पैदा हुए या पढे-लिखे लेकिन अब पढाई-लिखाई या काम-काज करवे कू करौली से बाहर निकलगे, बे सब करौली जिले के कछु काम आ सकें। बाकी तो आप बेब-साइट पै देख लिजो।
आज ई मेरो पैलो चिठ्ठौ हत्ते, और भी कछु लिखतौ रन्गौ। सबनसे इतेक इ कऊं कि बे भी कछु लिखैं और अपनी बोली की सुन्दरताए महसूस करैं।
गल्लैन दिन हैगे या भाषा में बोले। बैसे तो मैं कोसिस करूं कि कोइ अपन की तरफ़ कै मिल जाय तो बासे अपनी बोली में ही बोलूं।
रेवे कू तो मैं गल्लैन दूर अमरीका मैं रऊ, पर अपनी जमीन ते जुडे रेवे की पूरी पूरी कोसिस करूं। करौली के कछु छोरा-छोरीन्ने मिल्कैनी एक सन्गठन भी बना रक्खौए जाकौ ना "क्यारी" हत्ते, इतौ देख लिजो ।
"क्यारी" कौ उद्देश्य ई हतौ कि बे लोग जो करौली जिले मे कहींऊ पैदा हुए या पढे-लिखे लेकिन अब पढाई-लिखाई या काम-काज करवे कू करौली से बाहर निकलगे, बे सब करौली जिले के कछु काम आ सकें। बाकी तो आप बेब-साइट पै देख लिजो।
आज ई मेरो पैलो चिठ्ठौ हत्ते, और भी कछु लिखतौ रन्गौ। सबनसे इतेक इ कऊं कि बे भी कछु लिखैं और अपनी बोली की सुन्दरताए महसूस करैं।
